पटना और अरेराज के अपने क्लिनिक में मैं ऐसे लोगों को देखता हूँ जिनका छोटा छाला, त्वचा की दरार या घाव इलाज लेने से पहले बढ़ चुका होता है। डायबिटीज से जुड़ा फुट अल्सर गंभीर है, लेकिन पैर काटने की नौबत आना तय नहीं है। समय पर जाँच, घाव पर दबाव कम करना, संक्रमण या कम रक्त-प्रवाह का इलाज और नियमित फॉलो-अप पैर को बचाने में मदद कर सकते हैं।
सीधा जवाब: डायबिटीज में पैर पर नया घाव, छाला, कालापन, मवाद, फैलती लालिमा या गर्म-सूजा हुआ पैर दिखे तो दर्द का इंतजार न करें। उस जगह पर वजन कम रखें और जल्दी चिकित्सकीय जाँच कराएँ—बदलाव तेजी से बढ़े या तबीयत खराब हो तो उसी दिन urgent care लें।
डायबिटिक फुट अल्सर क्या है?
डायबिटिक फुट अल्सर पैर की त्वचा का खुला घाव है, जो आमतौर पर टखने के नीचे होता है। इसके पीछे अक्सर एक नहीं, कई कारण मिलकर काम करते हैं:
- पेरिफेरल न्यूरोपैथी: सुरक्षा देने वाली संवेदना कम होने से कट, जलना या जूते की रगड़ महसूस नहीं हो सकती। न्यूरोपैथी में जलन या दर्द भी हो सकता है; हर मरीज का पैर पूरी तरह सुन्न नहीं होता।
- बार-बार दबाव और पैर की बनावट: उभरी हड्डी, चाल में बदलाव, कैलस और गलत फिटिंग के जूते किसी एक जगह पर दबाव बढ़ाकर त्वचा तोड़ सकते हैं।
- पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD): पैर तक कम रक्त पहुँचना घाव भरने में देरी और संक्रमण/एम्प्यूटेशन का जोखिम बढ़ा सकता है।
- पहले का अल्सर या एम्प्यूटेशन, किडनी की बीमारी, तंबाकू और इलाज तक पहुँच की कठिनाई: इनसे जोखिम और बढ़ सकता है।
डायबिटीज में पैर का हर घाव अपने-आप “डायबिटिक अल्सर” नहीं होता और हर अल्सर दर्दरहित नहीं होता। मुख्य बात यह है कि संवेदना, रक्त-प्रवाह या संक्रमण-नियंत्रण खराब हो तो छोटा घाव भी तेजी से बिगड़ सकता है।
किन संकेतों पर तुरंत ध्यान दें?
दोनों पैरों के ऊपर, तलवे और उँगलियों के बीच देखें। इन स्थितियों में प्रशिक्षित डॉक्टर से जल्दी संपर्क करें:
- नया कट, दरार, छाला या खुला घाव;
- लालिमा, गर्माहट, सूजन या पैर की आकृति में नया बदलाव;
- मवाद, नया discharge या बदबू;
- त्वचा का नीला, मटमैला या काला होना;
- गहरा घाव, अंदर का tissue दिखना या हड्डी दिखने का संदेह; या
- घाव में सुधार न होना।
फैलती लालिमा/सूजन, कालापन या gangrene, तेजी से बढ़ता discharge, बुखार या ठंड लगना, confusion, बहुत कमजोरी, अथवा अचानक गर्म और सूजा हुआ बदले आकार का पैर हो तो उसी दिन urgent assessment कराएँ। डायबिटिक फुट इन्फेक्शन में बुखार न होना भी संभव है।
डायबिटीज में पैर की जाँच कैसे होनी चाहिए?
ADA Standards of Care in Diabetes—2026 के अनुसार डायबिटीज वाले लोगों की comprehensive foot evaluation कम-से-कम साल में एक बार होनी चाहिए। Protective sensation कम हो, पहले अल्सर/एम्प्यूटेशन हुआ हो, PAD, deformity या kidney failure हो तो जाँच ज्यादा बार चाहिए; sensory loss या पुराने ulcer/amputation में हर visit पर पैर देखना जरूरी है।
त्वचा, जूते और पैर की बनावट
जाँच में skin और nails, callus या pre-ulcerative बदलाव, पैर की आकृति, pressure points और footwear शामिल होते हैं। पुराने ulcer, amputation, Charcot foot, vascular procedure, smoking, kidney disease और नस/रक्त-प्रवाह से जुड़े मौजूदा symptoms का इतिहास भी महत्वपूर्ण है।
संवेदना: मोनोफिलामेंट के साथ एक और टेस्ट
10-ग्राम मोनोफिलामेंट को चुनी हुई जगहों पर हल्के से तब तक लगाया जाता है जब तक वह मुड़ न जाए; इससे त्वचा में चुभाया नहीं जाता। यह loss of protective sensation बताता है और इसके साथ कम-से-कम एक अन्य neurological test—जैसे pinprick, temperature या 128-Hz tuning fork से vibration—करना चाहिए। केवल monofilament से early neuropathy का पूरा diagnosis नहीं किया जाता।
रक्त-प्रवाह
पैर की pulses के साथ अन्य vascular signs देखे जाते हैं। चलते समय पिंडली में थकान/दर्द, आराम में पैर का दर्द, रंग बदलना या pulse कम/गायब होने पर ankle-brachial index, toe-pressure/Doppler और vascular assessment की जरूरत हो सकती है। केवल pulse छू लेना घाव भरने के लिए रक्त-प्रवाह की पूरी जाँच नहीं है।
Active ulcer में जगह, area और depth दर्ज करने के साथ infection, ischaemia और हड्डी के involvement का आकलन भी जरूरी है।
डायबिटिक फुट अल्सर का evidence-based इलाज
इलाज घाव और पूरे व्यक्ति—दोनों को देखकर तय होता है। केवल गोली या dressing अक्सर पर्याप्त नहीं होती।
1. दबाव कम करना (ऑफलोडिंग)
तलवे के अल्सर पर लगातार दबाव healing रोक सकता है। बिना complication वाले neuropathic forefoot या midfoot plantar ulcer के लिए IWGDF guidance उचित मरीज में non-removable knee-high offloading device—जैसे total-contact cast या irremovable walker—को पहली पसंद बताती है। Infection, ischaemia, ulcer की जगह, गिरने का जोखिम, उपलब्धता या patient tolerance अलग हो तो removable device, उचित footwear के साथ felted foam या अन्य विकल्प चुने जा सकते हैं। Offloading clinician की निगरानी में होना चाहिए; इसका अर्थ केवल “कम चलना” नहीं है।
2. एंटीबायोटिक केवल infection होने पर
Infection का diagnosis local या systemic inflammatory signs से clinical examination पर होता है। मवाद, लालिमा, गर्माहट, सूजन, tenderness और tissue changes महत्वपूर्ण हैं; बुखार होना जरूरी नहीं। मौजूदा IWGDF/IDSA guidance clinically uninfected ulcer में केवल infection रोकने या healing बढ़ाने के लिए local या systemic antibiotic देने से मना करती है। Infection होने पर दवा और duration उसकी severity, संभावित germs, kidney function, जरूरत पर culture और bone involvement के अनुसार तय होते हैं।
3. रक्त-प्रवाह जल्दी जाँचें
PAD में अच्छी dressing और glucose control के बावजूद healing रुक सकती है। Ulcer के साथ ischaemia का संदेह हो तो toe-pressure/Doppler, vascular imaging और समय पर angioplasty या bypass की suitability के लिए समीक्षा हो सकती है। Infection और PAD साथ हों तो coordination और भी urgent है।
4. डिब्राइडमेंट और सही dressing
प्रशिक्षित wound-care clinician जरूरत पर callus और dead/devitalised tissue हटाते हैं; इसे अक्सर sharp debridement कहा जाता है। इसे घर पर नहीं करना चाहिए। Severe ischaemia वाले non-infected ulcer में perfusion की जाँच से पहले debridement नुकसानदेह हो सकता है। Dressing घाव का अतिरिक्त fluid सँभालने और moist wound-healing environment बनाए रखने के लिए चुनी जाती है।
5. ग्लूकोज, पोषण और पूरी health plan
उचित glucose control, tobacco cessation, oedema और दूसरी बीमारियों का इलाज, medicines की समीक्षा, तथा पर्याप्त energy और protein healing को support करते हैं। Poor metabolic control recovery में देरी कर सकता है, लेकिन यह कहना गलत है कि glucose “perfect” होने तक कोई advanced treatment काम ही नहीं करेगा। Nutrition हर व्यक्ति में assess होना चाहिए; vitamin या protein supplement, deficiency या malnutrition की सही जाँच का विकल्प नहीं है।
6. न भरने वाले चुने हुए ulcers में advanced therapy
Optimal standard care के बाद भी ulcer में सुधार न हो तो interprofessional team कुछ evidence-supported adjuncts—जैसे selected skin substitutes, कुछ post-operative wounds में negative-pressure therapy या topical oxygen—पर विचार कर सकती है। ये offloading, infection control, पर्याप्त blood flow और नियमित reassessment का विकल्प नहीं हैं।
Saline, Betadine और hydrogen peroxide: सही बात क्या है?
“सिर्फ saline इस्तेमाल करें” और “Betadine कभी भी नहीं लग सकती”—दोनों statements जरूरत से ज्यादा absolute हैं। Saline का उपयोग आम है, लेकिन cleansing और dressing घाव, contamination, infection, उपलब्ध products और treating clinician की plan पर निर्भर करते हैं। IWGDF guidance केवल healing तेज करने के उद्देश्य से routine topical antiseptic या antimicrobial dressings की सलाह नहीं देती, क्योंकि इनका नियमित लाभ स्थापित नहीं है।
मरीज के लिए आसान नियम: डॉक्टर की सलाह के बिना Dettol, hydrogen peroxide, povidone-iodine या घरेलू लेप खुले ulcer में न डालें। उपलब्ध हो तो नए घाव को साफ non-adherent dressing से ढकें, उस पर दबाव कम रखें और जल्दी medical assessment कराएँ।
रोज की foot care: क्या करें और क्या न करें
| क्या करें | क्या न करें |
|---|---|
| Risk हो तो रोज पैरों के ऊपर, तलवे, एड़ी और उँगलियों के बीच देखें; unbreakable mirror या परिवार की मदद लें। | घाव छोटा या दर्दरहित देखकर उसे नजरअंदाज न करें। |
| पैर हल्के से धोकर उँगलियों के बीच अच्छी तरह सुखाएँ; पैरों को पानी में भिगोकर न रखें। | Sensation कम हो तो heating pad, hot-water bottle या बहुत गर्म पानी न लगाएँ। |
| Dry skin पर moisturiser लगाएँ, लेकिन उँगलियों के बीच की नम जगह को सूखा रखें। | Corn/callus को blade से न काटें और chemical corn plaster न लगाएँ। |
| सही fitting वाले protective footwear पहनें और पहनने से पहले जूते के अंदर देखें। | Loss of sensation या PAD हो तो घर में भी नंगे पैर, केवल मोजे या पतली चप्पल में न चलें। |
| सुरक्षित हो तो नाखून सीधे काटें; eyesight, circulation या sensation खराब हो तो trained help लें। | Nail के कोने अंदर तक न काटें और ingrown nail का इलाज खुद न करें। |
| Smoking/tobacco छोड़ें और अपने risk के अनुसार बताई foot-review schedule पर जाएँ। | बची हुई antibiotic न लें और किसी दूसरे की wound treatment copy न करें। |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या डायबिटिक फुट अल्सर पूरी तरह भर सकता है?
हाँ, समय पर coordinated care से बहुत से ulcers भर सकते हैं। Healing time ulcer की depth और जगह, infection, circulation, pressure relief, kidney health, glucose control और treatment plan नियमित रूप से follow करने पर निर्भर करता है।
घाव में दर्द नहीं है—क्या वह कम गंभीर है?
नहीं। कम दर्द loss of protective sensation का संकेत हो सकता है। Painless ulcer भी गहरा, infected या कम blood flow वाला हो सकता है; वहीं कुछ ulcers दर्द करते हैं।
क्या हर डायबिटिक फुट अल्सर में antibiotic चाहिए?
नहीं। Antibiotic clinically diagnosed infection का इलाज करती है, ulcer का नहीं। Doctor redness, warmth, swelling, discharge, depth और systemic features देखते हैं; fever न होने पर भी infection हो सकता है।
पहली बार घाव दिखे तो क्या करें?
उस जगह पर pressure रोकें, उपलब्ध हो तो साफ non-adherent dressing लगाएँ और जल्दी assessment कराएँ। घाव न काटें, पैर न भिगोएँ और तेज chemical न डालें। कालापन, फैलती लालिमा, बुखार या तेजी से बिगड़ना urgent care मांगता है।
Professional foot check कितनी बार होना चाहिए?
डायबिटीज में कम-से-कम साल में एक बार। Neuropathy, PAD, deformity, kidney failure या पुराने ulcer/amputation में जाँच ज्यादा बार होती है; कुछ high-risk feet को हर 1–3 महीने समीक्षा चाहिए।
पटना और अरेराज में diabetic foot care
समय पर review से neuropathy, pressure injury, infection या poor circulation को limb-threatening होने से पहले पहचाना जा सकता है। पटना में डायबिटीज देखभाल के बारे में पढ़ें, क्लिनिक appointment request भेजें, या डॉ. प्रत्युष कुमार के क्लिनिक से संपर्क करें। Diabetes में दूसरी जरूरी जाँचों के लिए kidney, आँख और पैर की screening checklist भी देखें।
चिकित्सकीय स्रोत
- American Diabetes Association: Retinopathy, Neuropathy, and Foot Care—Standards of Care in Diabetes 2026
- IWGDF Practical Guidelines on diabetes-related foot disease (2023)
- IWGDF/IDSA Guideline on diabetes-related foot infections (2023)
- IWGDF Offloading Guideline (2023)
- IWGDF Wound Healing Interventions Guideline (2023)
यह लेख स्वास्थ्य शिक्षा के लिए है और व्यक्तिगत चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं है। लक्षण, जाँच की रिपोर्ट, दवा और treatment decision qualified doctor से चर्चा करके तय करें।
सांस लेने में बहुत कठिनाई, सीने में दर्द, confusion, बेहोशी, uncontrolled bleeding, severe dehydration या तेजी से बिगड़ते लक्षणों में तुरंत emergency medical care लें।
